कहीं इस चुनाव के बाद मिट ना जाए ओला परिवार का राजस्थान से वजूद

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राजस्थान की राजनीति में जातिगत राजनीति का बड़ा बोलबाला है। राजस्थान में कई सीटें ऐसी हैं, जो जातिगत वोटों के आधार पर परंपरागत सीटें बन गई है।

राजस्थान के शेखावाटी अंचल की एक सीट है जो ओला परिवार की बपौती बन गई है।

शेखावाटी के जाने-माने जाट नेता शीशराम ओला जिन्होंने 10 विधानसभा चुनाव लड़े और 8 में जीत दर्ज की 5 लोकसभा चुनाव जीते 56 साल का सबसे लंबा चुनावी सफर तय किया दो बार जिला प्रमुख रहे है।

साथ ही उनकी पत्नी राजबाला भी विधायक रही है जिला प्रमुख भी बनी और उनके बडे बेटे ने पिता कि विरासत को संभाला है।बृजेश ओला भी विधायक और गहलोत सरकार में मंत्री रह चुके हैं।

लेकिन मौजूदा वक्त में झुंझुनू में सियासी समीकरण बदल रहे है, और ऐसे में ओला परिवार का वजूद खत्म होता जा रहा है।

और बदले समीकरणों के मध्यनजर सियासी जानकारों का कहना है, कि ओला परिवार का वजूद शीशराम ओला के दिंवगत होते ही यह सीट भी ओला परिवार के हाथ से निकल गई है।

और ऐसे में उनकी परंपरागत सीट से भी हारने का डर उनके बेटे को सता रहा है।

ओला परिवार के मिटते वजूद से कांग्रेस परेशान है, और शेखावाटी में कांग्रेस बेहद कमजोर नजर आ रही है।

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