जानिए कैसे पायलट को कमजोर करने मे जुटा है गेहलोत का खेमा

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राजस्थान की राजनीति मैं अशोक गहलोत कांग्रेस का सबसे कद्दावर चेहरा है। हालांकि गहलोत पिछले दिनों से राष्ट्रीय राजनीति में भी उभरते हुऐ नज़र आ रहे हैं।
क्योंकि पिछले दिनों पंजाब और गुजरात चुनाव के दौरान गहलोत की राजनैतिक जादूगरी कांग्रेस के काम आई है। लिहाजा राजस्थान में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर खींचतान चल रही है।

मौजूदा वक्त में कांग्रेस कई खेमों में बंटी हुई नज़र आ रही हैं, प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट से लेकर नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी और गाहे-बगाहे सीपी जोशी। इस बीच सदाबहार चेहरे के रूप में मीडिया के जरिए गहलोत कई बार अपने नाम को मुख्यमंत्री के लिए जाहिर करते रहे है।

ऐसे में जानते हैं क्यों पायलट की डगर मुश्किल है, राजनैतिक इतिहासकारो के मुताबिक।

1.गहलोत के पास छात्र राजनीति से लेकर एनएसयूआई ,युथ कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी संगठन में चार दशक से भी ज्यादा लंबा अनुभव है।

2.गहलोत के पास दो बार मुख्यमंत्री के रुप में एक प्रशासक का अनुभव है।

3.अशोक गहलोत सोनिया गांधी के साथ अब राहुल गांधी के करीबी भी है और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव है।

4.अशोक गहलोत 1998 के चुनाव में राजस्थान में सबसे ज्यादा वोटबैंक वाली जाट कौम को छकाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी भी हासिल करने में कामयाब रहे थे, मतलब गहलोत कूटनीतिक रुप से भी माहिर है।

5.2008 में अपने प्रतिद्वंद्वी सीपी जोशी को अपनी कूटनीति से किनारे कर दुसरी बार मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे थे गहलोत।

6.आज भी कांग्रेस में टिकट वितरण से लेकर शीर्ष आलाकमान तक गहलोत का कोई सानी नहीं है।

सियासी इतिहासकारों का मानना है, कि गहलोत बहुत चतुर राजनीतिज्ञ हैं। वह अपने प्रतिद्वंदी को कभी नहीं भूलते है और वह बहुत ही गोपनीय तरीके से अपने प्रतिद्वंदी को ठिकाने लगाने का काम करते हैं।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस बार गहलोत के प्रतिद्वंद्वी के रुप में पायलट है, और गहलोत खैमा सीपी जोशी कि तर्ज पर पायलट को चुनाव हरा सकता है, गहलोत के खैमें से खबर यहाँ तक भी है कि अगर गोटी फिट नहीं बैठी तो गहलोत समर्थित विधायक भाजपा को समर्थन दे सकते है।

गौरतलब है कि गहलोत ने अपने अबतक के सियासी सफर में अपने कई प्रतिद्वंद्वीयों को कई बार पट़खनी दी है। लेकिन गहलोत,पायलट के मुकाबले अनुभव में कोसों आगे और इसलिए गहलोत के आगे पायलट की डगर बहुत मुश्किल है।

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