पिछड़ी जातियों का उत्पीड़न पड़ेगा कांग्रेस को महंगा ?

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आजाद भारत में कांग्रेस की सरकार लंबे वक्त तक रही हैं, पंडित नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी से लेकर राजीव गांधी और मनमोहन सिंह तक। और ऐसे में कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं ने देश की पिछड़ी आदिवासी जातियों को दरकिनार करने का काम किया है। क्योंकि आजादी के बाद से माना गया है, कि कांग्रेस ने अपना कोर वोट बैंक बनाने के लिए मुसलमानों को ज्यादा मौके दिए है।

इसके चलते पिछड़ी जातियों को हाशिए पर धकेल दिया गया और आवाज उठाने पर इन पिछड़ी जाति के लोगों पर कांग्रेसी नेताओं द्धारा अत्याचार किऐ गये। सियासी जानकारों का कहना है की बेशक इंदिरा गांधी ने दबे कुचले लोगों को साधने के लिए गरीबी हटाओ का नारा दिया हो लेकिन यह बात सिर्फ नारे तक ही सीमित रही।

यही वजह हैं की आजादी के इतने साल बाद भी समाज का वो पिछड़ा वर्ग जो मुख्यधारा में नहीं आ सका यह पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की बडी नाकामी है। सियासी जानकारों का कहना की कांग्रेस के घटते जनाधार के पीछे उनकी पिछड़ो के साथ किया सौतेला रुख ही वजह है।

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